श्री राम शलाका प्रश्नावली
उत्तर पुराने छपे स्रोतों से अंक-दर-अंक मिलाए गए · 17 अक्टूबर 2026 को छपा
राम शलाका प्रश्नावली 225 अक्षरों का चक्र है, जो गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के साथ छपता आया है। मन में एक प्रश्न रखकर किसी अक्षर को छुएं। वहाँ से हर नौवां अक्षर पढ़ने पर नौ में से एक चौपाई बनती है, वही आपका उत्तर है।
प्रश्न पूछने के लिए किसी भी अक्षर को छुएं।
- शांत होकर बैठें और श्री राम का ध्यान करें। नीचे दिया मंत्र ग्यारह बार बोलें।
- मन में एक ही प्रश्न साफ़ शब्दों में रखें।
- आँखें बंद करके चक्र के किसी भी अक्षर को छुएं।
मंत्र: श्री राम जय राम जय जय राम, 11 बार बोलें
प्रश्न पूछने के लिए किसी भी अक्षर को छुएं।
राम शलाका प्रश्नावली कैसे काम करती है?
चक्र में 15 पंक्तियां हैं और हर पंक्ति में 15 खाने, यानी कुल 225 खाने। हर खाने में एक अक्षर या मात्रा है। जिस खाने को आप छूते हैं, वहाँ से नौ-नौ खाने आगे गिनते जाइए। आखिरी खाने के बाद गिनती फिर पहले खाने से चलती है। 25 कदम बाद आप वहीं लौट आते हैं, और रास्ते के 25 अक्षर मिलकर एक चौपाई बना देते हैं।
कुल नौ ही रास्ते बनते हैं, क्योंकि 225 में ठीक 25 बार नौ आता है। आप कोई भी खाना छुएं, उत्तर रामचरितमानस की इन्हीं नौ चौपाइयों में से एक होगा। इनमें छह बालकाण्ड की हैं, दो सुन्दरकाण्ड की और एक लंकाकाण्ड की। हर चौपाई का एक पारंपरिक फल है। यह पेज अक्षर पढ़ते हुए उनका रास्ता चमकाता है, ताकि आप चौपाई बनते देख सकें।
राम शलाका प्रश्नावली कहाँ से आई?
यह चक्र गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ा जाता है, जिन्होंने संवत 1631 (सन 1574) में अयोध्या में अवधी में रामचरितमानस लिखना शुरू किया। मानस की छपी प्रतियों में शलाका चक्र बहुत समय से शुरू के पन्नों पर छपता आया है, नीचे नौ चौपाइयां और उनका फल लिखा रहता है। उत्तर भारत के घरों में लोग यात्रा या परीक्षा के नतीजे से पहले इसे देखते आए हैं।
इस पेज पर फल उसी पारंपरिक सूची के अनुसार है। हमने चक्र को खाने-खाने मिलाया है: नौ शुरुआती खानों से हर नौवां अक्षर पढ़ने पर ठीक यही नौ चौपाइयां बनती हैं, और इस साइट का एक टेस्ट हर बदलाव पर यह फिर से जाँचता है। चौपाइयों के अर्थ हमारे अपने शब्दों में हैं।
शलाका से प्रश्न कैसे पूछें?
एक ही प्रश्न पूछें और उसे सीधा रखें। "क्या यह नौकरी मिलेगी?" जैसा प्रश्न तीन चिंताओं को एक साथ पूछने से बेहतर है। हो सके तो स्नान करके बैठें, एक मिनट श्री राम को याद करें, फिर चक्र को छुएं।
एक दिन में एक ही बात दोबारा न पूछें। परंपरा में दूसरी बार पूछना पहले उत्तर पर शक करना माना जाता है। ज़्यादातर घरों में दिन भर में तीन से ज़्यादा प्रश्न नहीं पूछे जाते। उत्तर से मन बेचैन हो तो दोबारा छूने के बजाय एक रात रुक जाएं।
अगर चौपाई कहे कि काम में संदेह है तो क्या करें?
नौ में से तीन चौपाइयां सावधान करती हैं और एक कहती है कि बात राम पर छोड़ दें। इसका मतलब रुककर सोचना है, यह कोई फैसला नहीं जो आप पर सुना दिया गया हो। चौपाई के शब्द पढ़िए: "बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं" आपकी संगत की ओर इशारा करती है, और "होइहि सोई जो राम रचि राखा" कहती है कि ज़ोर लगाना छोड़कर भरोसा रखें।
बहुत लोग कठिन उत्तर मिलने पर योजना दोबारा देखते हैं, घर के बड़ों से बात करते हैं या अच्छे दिन की प्रतीक्षा करते हैं। गृह प्रवेश या गाड़ी खरीदने जैसे किसी ज़रूरी काम की शुरुआत के लिए अपने शहर का चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त देख लें।
राम शलाका के सभी 9 उत्तर
हर अंक और उसका उत्तर, जैसा चक्र में है। पहले प्रश्न पूछें, फिर पढ़ें।
राम शलाका के सभी 9 उत्तर
| चौपाई | उत्तर |
|---|---|
| 1 | सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥सुनो सीता, हमारा आशीर्वाद सच्चा है। तुम्हारे मन की कामना पूरी होगी।शुभ: प्रश्न शुभ है। जो आप चाहते हैं, वह पूरा होगा। |
| 2 | प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥कोसलपुर के राजा श्री राम को हृदय में रखकर नगर में प्रवेश करो और अपने सब काम करो।शुभ: भगवान का नाम लेकर काम शुरू करें, सफलता मिलेगी। |
| 3 | उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥अंत में भेद खुल ही जाता है और दिखावा निभता नहीं, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का नहीं निभा।सावधान: इस काम में भलाई नहीं दिखती। सफलता में संदेह है। |
| 4 | बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥भाग्यवश सज्जन बुरी संगत में पड़ जाते हैं, फिर भी साँप की मणि की तरह अपना गुण नहीं छोड़ते।सावधान: गलत लोगों का साथ छोड़ें। काम पूरा होने में संदेह है। |
| 5 | होइहि सोई जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥वही होगा जो राम ने रच रखा है। तर्क करके बात को और क्यों बढ़ाया जाए।धीरज रखें: काम होने में संदेह है। इसे भगवान पर छोड़ देना ही ठीक है। |
| 6 | मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥संतों का समाज आनंद और मंगल से भरा है। वह संसार में चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग है।शुभ: प्रश्न शुभ है। काम सिद्ध होगा। |
| 7 | गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥जिस पर राम की कृपा हो उसके लिए विष अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं, समुद्र गाय के खुर जितना और आग ठंडी हो जाती है।शुभ: प्रश्न बहुत शुभ है। काम सफल होगा। |
| 8 | बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा॥वरुण, कुबेर, इंद्र और पवन में से कोई भी युद्ध में रावण के सामने धीरज नहीं रख सका।सावधान: काम पूरा होने में संदेह है। |
| 9 | सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे॥तुम्हारे मनोरथ सफल हों। यह सुनकर राम और लक्ष्मण प्रसन्न हुए।शुभ: प्रश्न बहुत शुभ है। मनोरथ पूरा होगा। |
राम शलाका: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या राम शलाका ज्योतिष है?
नहीं। इसमें जन्म कुंडली या ग्रहों का कोई हिसाब नहीं होता। यह भक्ति की एक रीति है: आप राम जी से प्रश्न पूछते हैं और उत्तर रामचरितमानस की चौपाई में पढ़ते हैं।
क्या एक ही बात राम शलाका से दो बार पूछ सकते हैं?
परंपरा के अनुसार नहीं। एक बार पूछें, जो चौपाई आए उसे स्वीकार करें, और हालात सच में बदलें तो किसी और दिन पूछें।
225 अक्षर होते हुए भी उत्तर नौ ही क्यों हैं?
क्योंकि 225 को 9 से भाग देने पर 25 आता है। किसी भी खाने से हर नौवां खाना गिनने पर नौ तय रास्तों में से एक ही बनता है, इसलिए हर खाना ठीक एक चौपाई का हिस्सा है।
राम शलाका देखने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
बहुत लोग सुबह स्नान के बाद, ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय के कुछ देर बाद पूछते हैं, जब मन शांत रहता है। साफ़ प्रश्न और शांत मन हो तो कोई भी समय ठीक है।
और प्रश्नावलियां
आज के समय देखें
प्रश्नावली भक्ति का मार्गदर्शन है, भविष्यवाणी नहीं। सेहत, पैसे या कानून से जुड़े फैसलों में किसी जानकार की सलाह भी लें।
चित्र: रवि वर्मा प्रेस के लगभग 1910 के छापे, सार्वजनिक डोमेन (विकिमीडिया कॉमन्स)।



