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प्रश्नावली: अपना प्रश्न पूछें

प्रश्नावली भक्ति का एक चक्र है, जिसे मन में एक प्रश्न रखकर देखा जाता है। देवता को याद करके बिना देखे किसी अक्षर या अंक को छुएं और उसके आगे लिखा उत्तर पढ़ें। यहाँ वे पाँच चक्र हैं जिनके उत्तर बिना बदले चले आए हैं, और हर एक को हमने अंक-दर-अंक मिलाकर लिखा है।

कौन सी प्रश्नावली चुनें?

जिस तरह के प्रश्न के लिए आप जिस देवता की ओर देखते हैं, वही चुनें। राम शलाका सबसे पुरानी और सबसे जानी-मानी है: इसका उत्तर रामचरितमानस की एक चौपाई होता है, इसलिए यह उस प्रश्न के लिए है जो आप सीधे राम जी से पूछना चाहते हैं। हनुमान प्रश्नावली हिम्मत के लिए और न टलने वाली परेशानी के लिए है, और इसके 49 में से बहुत से उत्तरों के साथ उपाय है।

गणेश प्रश्नावली शुरुआत के लिए है: व्यापार, नौकरी या घर बदलना। दुर्गा प्रश्नावली छोटे और सीधे उत्तर देती है और नवरात्रि में सबसे ज़्यादा देखी जाती है। शिव प्रश्नावली में बस सात उत्तर हैं, हर एक के साथ उपाय, और लोग इसे सोमवार और सावन में देखते हैं।

प्रश्नावली से प्रश्न कैसे पूछें?

यहाँ का हर चक्र कुछ एक जैसी बातें मांगता है। एक ही प्रश्न पूछें, साफ़ और अपने शब्दों में। पहले देवता का मंत्र बोलें, उतनी बार जितना पेज पर लिखा है। चक्र को बिना चुने छुएं, हो सके तो आँखें बंद करके।

एक ही प्रश्न उसी दिन दोबारा न पूछें, और दिन भर में तीन से ज़्यादा प्रश्न न पूछें। दूसरी बार पूछना पहले उत्तर पर शक करने जैसा माना जाता है। उत्तर से मन बेचैन हो तो एक रात रुकें, और हालात सच में बदलें तो किसी और दिन फिर पूछें।

क्या प्रश्नावली ज्योतिष है?

नहीं। ज्योतिष किसी पल के ग्रहों को पढ़ता है, जैसे जन्म का या यात्रा शुरू होने का पल, और यही यह साइट चौघड़िया और राहु काल के लिए निकालती है। प्रश्नावली आकाश से कुछ नहीं पढ़ती: यह उत्तर वाली एक प्रार्थना है, और इसका आधार उस देवता पर आपकी आस्था है जिनसे आपने पूछा।

इसलिए दोनों एक-दूसरे के साथ चलते हैं। लोग अक्सर प्रश्नावली से पूछते हैं कि काम आगे बढ़ाएं या नहीं, और फिर दिन के अच्छे समय में से शुरुआत का समय चुनते हैं।

प्रश्नावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ऑनलाइन प्रश्नावली छपे चक्र जितनी ही सही है?

चक्र और उसके उत्तर वही हैं, बस कागज़ नहीं है। परंपरा में असली बात वह प्रश्न है जो आप मन में रखते हैं और वह आस्था जिससे आप पूछते हैं।

यहाँ पाँच ही प्रश्नावलियां क्यों हैं?

हम वही चक्र रखते हैं जिसके उत्तर अलग-अलग पुराने स्रोतों में अंक-दर-अंक एक जैसे हों। दूसरे देवताओं की ऑनलाइन प्रश्नावलियां हर साइट पर अलग हैं, इसलिए उत्तर गढ़ने के बजाय हमने उन्हें छोड़ दिया।

क्या पूछने से पहले स्नान ज़रूरी है?

यही रीति है, और बहुत लोग सुबह स्नान और पूजा के बाद पूछते हैं। यह संभव न हो तो हाथ-मुँह धोकर एक मिनट शांत बैठें, फिर पूछें।

क्या उत्तर किसी को भेज सकते हैं?

हाँ। उत्तर आने के बाद शेयर बटन उसकी एक तस्वीर बनाता है, जिसमें देवता, उत्तर और पेज का लिंक होता है, जिसे व्हाट्सऐप पर भेजा जा सकता है।

प्रश्नावली भक्ति का मार्गदर्शन है, भविष्यवाणी नहीं। सेहत, पैसे या कानून से जुड़े फैसलों में किसी जानकार की सलाह भी लें।

चित्र: रवि वर्मा प्रेस के लगभग 1910 के छापे, सार्वजनिक डोमेन (विकिमीडिया कॉमन्स)।