धनतेरस 2026
धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा कैसे करें: विधि और मुहूर्त 2026
चौघड़िया नाउ · 20 अक्टूबर 2026 को छपा · 6 मिनट में पढ़ें
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है, और धन्वंतरि पूजा उसी शाम प्रदोष काल में की जाती है। नई दिल्ली में प्रदोष काल शाम 5:32 से 8:09 बजे तक है। पंचांग इसके भीतर स्थिर वृषभ लग्न वाला हिस्सा पूजा का मुख्य मुहूर्त बताते हैं, जो दिल्ली में शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे लगेगी और 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे तक रहेगी, इसलिए पूरी शाम त्रयोदशी में है। नीचे पूजा की विधि है और 30 शहरों में प्रदोष काल का समय।
धनतेरस पर धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?
पुराणों की कथा है कि समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर निकले थे, और परंपरा इस घटना को कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से जोड़ती है। इसीलिए इस दिन को धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहते हैं। धन्वंतरि विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, इसलिए इस दिन की पहली प्रार्थना सेहत और लंबी उम्र की होती है, सोने-चांदी की नहीं।
“धनतेरस” नाम में धन का मतलब संपत्ति भी लिया जाता है, और इसी दिन बर्तन, सोना या चांदी खरीदने की परंपरा भी है। बहुत से घरों में शाम को धन्वंतरि के साथ लक्ष्मी जी, कुबेर और गणेश जी की पूजा एक साथ होती है। खरीदारी का शुभ समय हमारे लेख धनतेरस और दिवाली 2026 का चौघड़िया में है।

धन्वंतरि पूजा के लिए क्या सामग्री चाहिए?
घर की पूजा के लिए बहुत कुछ नहीं चाहिए। आम तौर पर यह सामान रखा जाता है:
- चौकी और उस पर बिछाने के लिए पीला या लाल कपड़ा
- भगवान धन्वंतरि की तस्वीर या मूर्ति (साथ में लक्ष्मी-गणेश, अगर उनकी भी पूजा करनी हो)
- घी का दीया, धूप या अगरबत्ती
- रोली, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल) और जल से भरा लोटा
- पीले फूल, तुलसी के पत्ते और भोग के लिए मिठाई या फल
- यम के दीपक के लिए सरसों के तेल का चौमुखा दीया
घर पर धन्वंतरि पूजा की विधि क्या है?
पूजा प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त के बाद की शुरुआती ढाई घंटे में की जाती है। घर का पूजा स्थान साफ करके चौकी पर कपड़ा बिछाएं और धन्वंतरि की तस्वीर रखें। मुंह पूर्व या उत्तर की ओर रहे। घी का दीया जलाकर पहले गणेश जी का ध्यान करें, फिर धन्वंतरि का।
इसके बाद धन्वंतरि को जल, रोली, हल्दी, अक्षत, पीले फूल और तुलसी चढ़ाएं, और मिठाई या फल का भोग लगाएं। फिर “ॐ धन्वंतरये नमः” मंत्र का जाप करें; बहुत से लोग 108 बार जपते हैं, पर गिनती से ज्यादा जरूरी मन लगाना है। अंत में परिवार की सेहत के लिए प्रार्थना करें और अपने घर की आरती करें। घर में कोई बीमार हो, तो बहुत से परिवार उसके नाम से अलग से प्रार्थना करते हैं।
धन्वंतरि का मंत्र और आरती कहां से लें?
सबसे आसान और हर जगह बोला जाने वाला मंत्र है: ॐ धन्वंतरये नमः। धन्वंतरि का एक लंबा मंत्र और उनकी आरती भी प्रचलित है, पर अलग-अलग पुस्तकों और वेबसाइटों पर इनके शब्दों में फर्क मिलता है। पूजा का पाठ हम तभी छापते हैं जब दो या ज्यादा भरोसेमंद स्रोत शब्दशः मिलें, इसलिए लंबा मंत्र और आरती अपने घर की पूजा पुस्तक या पुरोहित जी से लें।
यम का दीपक कब और कैसे जलाएं?
धनतेरस की शाम का दूसरा जरूरी काम यम दीपदान है। प्रदोष काल में सरसों के तेल का चौमुखा दीया (चार बत्तियों वाला) जलाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रखा जाता है। मान्यता है कि यह दीया यमराज के नाम का है और घर के लोगों को अकाल मृत्यु से बचाता है। इसे पूजा के बाद, प्रदोष काल रहते ही जलाएं।
आपके शहर में धनतेरस का प्रदोष काल कब है?
प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर रात का पहला पांचवां हिस्सा होता है, इसलिए हर शहर में अलग है: कटिहार में शाम 4:55 बजे शुरू होता है और राजकोट में 6:07 बजे। शहर के नाम पर टैप करें तो उस दिन का पूरा चौघड़िया खुल जाएगा।
| शहर | प्रदोष काल (6 नवंबर) |
|---|---|
| नई दिल्ली | शाम 5:32 से रात 8:09 |
| मुंबई | शाम 6:02 से रात 8:34 |
| कोलकाता | शाम 4:56–7:30 |
| बेंगलुरु | शाम 5:51 से रात 8:20 |
| पटना | शाम 5:05–7:40 |
| लखनऊ | शाम 5:20–7:56 |
| जयपुर | शाम 5:40 से रात 8:16 |
| अहमदाबाद | शाम 5:58 से रात 8:32 |
बाकी 22 शहरों का समय देखें
| शहर | प्रदोष काल (6 नवंबर) |
|---|---|
| सूरत | शाम 6:00 से रात 8:33 |
| राजकोट | शाम 6:07 से रात 8:40 |
| वडोदरा | शाम 5:57 से रात 8:30 |
| जोधपुर | शाम 5:52 से रात 8:28 |
| हैदराबाद | शाम 5:42 से रात 8:13 |
| चेन्नई | शाम 5:40 से रात 8:09 |
| पुणे | शाम 5:59 से रात 8:31 |
| कानपुर | शाम 5:23–7:58 |
| नागपुर | शाम 5:35 से रात 8:08 |
| इंदौर | शाम 5:46 से रात 8:19 |
| भोपाल | शाम 5:39 से रात 8:13 |
| वाराणसी | शाम 5:14–7:49 |
| चंडीगढ़ | शाम 5:31 से रात 8:09 |
| जालंधर | शाम 5:35 से रात 8:13 |
| कटिहार | शाम 4:55–7:30 |
| लुधियाना | शाम 5:34 से रात 8:12 |
| अमृतसर | शाम 5:37 से रात 8:16 |
| आगरा | शाम 5:31 से रात 8:07 |
| रांची | शाम 5:07–7:41 |
| उदयपुर | शाम 5:52 से रात 8:26 |
| भावनगर | शाम 6:02 से रात 8:35 |
| कोयंबटूर | शाम 5:56 से रात 8:24 |
वृषभ लग्न वाला छोटा मुहूर्त (दिल्ली में 6:02 से 7:57) शहर के साथ बदलता है और यह साइट लग्न की गणना नहीं करती, इसलिए बाकी शहरों के लिए तालिका का प्रदोष काल लें या अपने स्थानीय पंचांग में वृषभ काल देख लें।
क्या धनतेरस की शाम का चौघड़िया देखना जरूरी है?
नहीं। शुक्रवार की रात रोग और फिर काल चौघड़िया से शुरू होती है, और प्रदोष काल ज्यादातर इन्हीं में पड़ता है। फिर भी धन्वंतरि पूजा और यम का दीपक प्रदोष काल में ही होते हैं, क्योंकि यह परंपरा चौघड़िया से नहीं, प्रदोष से चलती है। चौघड़िया का सवाल खरीदारी के लिए है, और उसके लिए सुबह का लाभ और अमृत सबसे अच्छा है। धनतेरस पर क्या खरीदें, यह हमारे लेख धनतेरस पर क्या खरीदें में है।
हर शहर का समय 20 अक्टूबर 2026 को उसके अक्षांश-देशांतर से निकाला गया। तारीख और दिल्ली का वृषभ काल एक प्रामाणिक पंचांग से मिलाए गए; गणना का तरीका यहां देखें।
आज के समय देखें
यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।
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