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मूर्ति वास्तु

हाथी, कछुआ, उल्लू और सात घोड़े: घर में कहाँ रखें

वास्तु और लोक मान्यता में हाथी की मूर्ति ड्राइंग रूम या मुख्य द्वार के पास जोड़े में, सूंड ऊपर करके रखी जाती है। धातु का कछुआ उत्तर दिशा में, मुंह घर के अंदर की ओर। सात दौड़ते घोड़ों की तस्वीर पूर्व या दक्षिण की दीवार पर, घोड़े घर के अंदर की ओर दौड़ते हुए। उल्लू की मूर्ति पर परिवारों में दो मत हैं।

ये चारों चीजें गिफ्ट की दुकानों पर सबसे ज्यादा बिकती हैं, और गृह प्रवेश या दिवाली पर अक्सर उपहार में मिलती हैं। फिर सवाल आता है: इसे रखें कहाँ? एक बात पहले ही जान लें: कछुए और कुछ और चीजों के बारे में जो नियम “वास्तु” के नाम से बताए जाते हैं, उनमें से कई चीनी फेंगशुई से आए हैं। इस लेख में जहां ऐसा है, वहां बताया गया है।

हाथी की मूर्ति (Elephant Statue) घर में कहाँ और कैसे रखें?

हाथी को भारतीय परंपरा में गणेश जी और लक्ष्मी जी, दोनों से जोड़ा जाता है। गजलक्ष्मी के चित्र में दो हाथी लक्ष्मी जी का अभिषेक करते दिखते हैं। इसलिए हाथी को घर में स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

हाथी की मूर्ति के लिए सबसे आम नियम ये हैं:

  • जोड़े में रखें: एक की जगह दो हाथी, खासकर मुख्य द्वार के दोनों तरफ या ड्राइंग रूम में।
  • सूंड ऊपर उठी हो: ऊपर उठी सूंड को खुशी और स्वागत का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग नीचे की सूंड को स्थिरता का प्रतीक मानते हैं, पर घर के लिए ज्यादातर ऊपर की सूंड चुनी जाती है।
  • धातु: पीतल या चांदी के हाथी को सबसे अच्छा माना जाता है। लकड़ी और पत्थर के हाथी भी रखे जाते हैं।
  • दिशा: मुख्य द्वार के अंदर, मुंह दरवाजे की ओर, या ड्राइंग रूम की उत्तर दीवार के पास। चांदी के हाथी को कई लोग तिजोरी या अलमारी में भी रखते हैं।
  • बेडरूम में: पति-पत्नी के कमरे में हाथी का जोड़ा रखने की भी मान्यता है, आपसी मेल के प्रतीक के रूप में।

टूटे हुए दांत या खंडित सूंड वाली मूर्ति न रखें। मूर्ति पर धूल जमने न दें।

कछुआ (Tortoise) घर में किस दिशा में रखना चाहिए?

कछुए को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार से जोड़ा जाता है। समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत कछुए की पीठ पर टिका था। इस वजह से कछुए को स्थिरता और लंबी उम्र का प्रतीक माना जाता है।

कछुआ रखने के जो नियम आजकल बताए जाते हैं, वे वास्तु और फेंगशुई का मिला-जुला रूप हैं:

  1. उत्तर दिशा: धातु के कछुए को उत्तर में रखा जाता है, जिसे कुबेर और जल की दिशा माना जाता है।
  2. पानी की प्लेट में: पीतल या कांसे की प्लेट में थोड़ा पानी भरकर उसमें कछुआ रखने का चलन है। पानी हर दूसरे-तीसरे दिन बदलें, वरना उसमें मच्छर पनप सकते हैं।
  3. मुंह अंदर की ओर: कछुए का मुंह घर के अंदर की तरफ हो, बाहर की ओर नहीं।
  4. धातु या क्रिस्टल: पीतल, चांदी या कांच (क्रिस्टल) का कछुआ आम है। लकड़ी का कछुआ कुछ लोग पूर्व या दक्षिण-पूर्व में रखते हैं।
  5. बेडरूम में नहीं: ज्यादातर जानकार कछुए को बेडरूम की जगह ड्राइंग रूम या दफ्तर की मेज पर रखने की सलाह देते हैं।

असली कछुआ पालने को इन नियमों से न जोड़ें। भारत में ज्यादातर कछुओं की प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत आती हैं, और उन्हें घर में रखना अपराध हो सकता है।

उल्लू की मूर्ति घर में रखें या नहीं?

उल्लू लक्ष्मी जी का वाहन है। इसी वजह से कई परिवार दिवाली पर उल्लू की छोटी मूर्ति घर लाते हैं और उसे तिजोरी या पूजा स्थान के पास रखते हैं। कुछ लोग उल्लू की मूर्ति को पढ़ाई की जगह रखते हैं, क्योंकि पश्चिमी परंपरा में उल्लू समझदारी का प्रतीक है।

पर उत्तर भारत के बहुत से घरों में उल्लू को अशुभ माना जाता है। “उल्लू बोलना” या घर की छत पर उल्लू का बैठना कई जगह बुरा संकेत समझा जाता है, और किसी को उल्लू कहना गाली है। इसलिए यहां सच में दो मत हैं:

  • रखने वाले मत के अनुसार: उल्लू की मूर्ति लक्ष्मी जी के प्रतीक के रूप में तिजोरी के पास, दक्षिण-पश्चिम या उत्तर में रखी जाती है। कुछ लोग इसे मुख्य द्वार की ओर देखते हुए रखते हैं, ताकि बुरी नजर रुके।
  • न रखने वाले मत के अनुसार: उल्लू रात का पक्षी है और उसे अकेलेपन से जोड़ा जाता है, इसलिए घर में उसकी मूर्ति नहीं रखी जाती।

अगर आपके परिवार में उल्लू को लेकर असहजता है, तो इसे रखने की कोई जरूरत नहीं। लक्ष्मी पूजा उल्लू की मूर्ति के बिना भी पूरी होती है। एक बात दोनों मत मानते हैं: असली उल्लू पकड़ना या दिवाली पर उसकी बलि जैसी बातें गैरकानूनी हैं, और उल्लू संरक्षित पक्षी है।

सात दौड़ते घोड़ों की पेंटिंग (7 Horses Painting) किस दीवार पर लगाएं?

सात घोड़ों की तस्वीर को सूर्य देव के रथ से जोड़ा जाता है, जिसे सात घोड़े खींचते हैं। इसलिए इसे तरक्की, गति और सफलता का प्रतीक माना जाता है। दफ्तरों और दुकानों में यह तस्वीर बहुत दिखती है।

तस्वीर के नियम ये हैं:

  1. पूर्व की दीवार: सूर्य की दिशा होने से पूर्व को सबसे अच्छा माना जाता है।
  2. दक्षिण की दीवार: कई वास्तु जानकार दक्षिण को भी अच्छा बताते हैं, क्योंकि यह अग्नि और यश की दिशा मानी जाती है। ऑफिस में अपनी कुर्सी के पीछे की दीवार पर भी लोग लगाते हैं।
  3. घोड़े अंदर की ओर दौड़ें: तस्वीर ऐसी जगह लगाएं कि घोड़े दरवाजे से बाहर की ओर भागते न दिखें।
  4. सात ही हों: तस्वीर में पूरे सात घोड़े साफ दिखें। सफेद घोड़ों को सबसे अच्छा माना जाता है।
  5. शांत चेहरे: गुस्से में, लगाम टूटे या एक-दूसरे से लड़ते घोड़े न हों।
  6. बेडरूम और पूजा घर में नहीं: यह तस्वीर ड्राइंग रूम, स्टडी या ऑफिस के लिए है।

घर की बाकी तस्वीरों के नियम, जैसे पितरों और हनुमान जी की तस्वीर, हमारे घर में कौन सी तस्वीरें लगाएं वाले लेख में हैं।

इन मूर्तियों को रखते समय आम गलतियां क्या हैं?

सबसे आम गलती है एक ही कमरे में बहुत सी चीजें भर देना। हाथी, कछुआ, लाफिंग बुद्धा, पिरामिड और क्रिस्टल, सब एक ही शेल्फ पर। वास्तु की बुनियादी बात खुली, साफ और कम भरी जगह है। दो-तीन चीजें सोच-समझकर रखें।

दूसरी गलती है डर के कारण चीजें खरीदना। कोई कहता है कि कछुआ नहीं रखा तो पैसा नहीं टिकेगा, तो लोग जल्दी में खरीद लेते हैं। कोई मूर्ति धन या सेहत की गारंटी नहीं देती; ये प्रतीक हैं, जो घर को सजाते हैं और परंपरा से जोड़ते हैं। धन से जुड़े वास्तु नियमों पर हमारा अलग लेख है: पैसा क्यों नहीं टिकता? वास्तु में धन कहाँ रखें।

तीसरी गलती है टूटी मूर्ति रखे रहना। खंडित मूर्ति को परंपरा में घर में नहीं रखा जाता। उसे बहते पानी में प्रवाहित करें या किसी पेड़ के नीचे मिट्टी में रख दें। मुख्य द्वार पर रखी जाने वाली चीजों के लिए मुख्य द्वार का वास्तु देखें।

मूर्तियों से जुड़े सामान्य सवाल

क्या प्लास्टिक का हाथी या कछुआ रख सकते हैं?

रख सकते हैं, पर परंपरा में धातु, पत्थर, लकड़ी या मिट्टी को बेहतर माना जाता है। सजावट के लिए प्लास्टिक की मूर्ति रखने से कोई दोष नहीं माना जाता।

गिफ्ट में मिली मूर्ति का क्या करें?

अगर वह आपके घर की परंपरा से मेल खाती है, तो ऊपर बताई दिशा में रख दें। नहीं खाती, तो सम्मान से किसी और को दे सकते हैं। उपहार देने और लेने के नियमों पर हमने धनतेरस और दिवाली वाले लेख में भी लिखा है।

लाफिंग बुद्धा वास्तु का हिस्सा है?

नहीं, लाफिंग बुद्धा चीनी फेंगशुई से आया है। भारतीय वास्तु शास्त्र में इसका कोई उल्लेख नहीं है। बहुत से लोग इसे खुशी के प्रतीक के रूप में रखते हैं, और यह आपकी पसंद है।

यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।

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