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रसोई का वास्तु (Kitchen Vastu): सही दिशा, रंग और उपाय

वास्तु शास्त्र में रसोई (किचन) के लिए सबसे अच्छी जगह घर का दक्षिण-पूर्व कोना माना जाता है, जिसे आग्नेय कोण कहते हैं। यह संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दूसरा विकल्प है। खाना बनाते समय मुंह पूर्व की ओर रहे, चूल्हा और सिंक एक-दूसरे से सटे न हों, और उत्तर-पूर्व (ईशान) में रसोई से बचा जाता है।

यह नियम पढ़ने में आसान है, पर ज्यादातर लोगों के पास नक्शा बदलने का विकल्प नहीं होता। नोएडा या पुणे के किराए के 2BHK में रसोई जहां बनी है, वहीं रहेगी। इसलिए इस लेख में दो हिस्से हैं: पहले परंपरा क्या कहती है, फिर उस रसोई में क्या किया जा सकता है जिसकी दीवार आप तोड़ नहीं सकते।

वास्तु के अनुसार रसोई (किचन) किस दिशा में होनी चाहिए?

वास्तु शास्त्र में हर दिशा का एक तत्व और एक देवता माना गया है। दक्षिण-पूर्व अग्नि का कोना है, इसलिए चूल्हे की आग के लिए इसे सबसे स्वाभाविक जगह माना जाता है। पुराने घरों में यह व्यावहारिक भी था: सुबह की धूप पूर्व से आती थी और दक्षिण की हवा धुआं बाहर ले जाती थी।

उत्तर-पश्चिम वायु का कोना है। कई वास्तु सलाहकार इसे रसोई के लिए दूसरा अच्छा विकल्प बताते हैं। कुछ पुराने जानकार दक्षिण दिशा को भी चल जाने वाला मानते हैं, जबकि कुछ इससे मना करते हैं। यहां मत एक नहीं है, इसलिए किसी एक राय को अंतिम सच न मानें।

जिन जगहों पर लगभग सभी मत एक हैं, वे ये हैं:

  • उत्तर-पूर्व (ईशान): यह जल और पूजा का कोना माना जाता है। यहां आग जलाना वास्तु में सबसे बड़ा दोष गिना जाता है।
  • दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य): यह घर के मुखिया और भारी सामान की जगह मानी जाती है, रसोई की नहीं।
  • बाथरूम के ठीक ऊपर, नीचे या बगल में: रसोई और शौचालय की दीवार साझा न हो, यह साफ-सफाई के लिहाज से भी समझ आता है।

किचन में गैस चूल्हा, सिंक और फ्रिज कहाँ रखें?

रसोई कहीं भी हो, उसके अंदर भी दिशाओं का यही क्रम लागू किया जाता है। यानी रसोई खुद उत्तर में हो, तब भी उसके अंदर का दक्षिण-पूर्व हिस्सा चूल्हे के लिए चुना जाता है।

  1. चूल्हा या गैस: रसोई के दक्षिण-पूर्व हिस्से में, इस तरह कि पकाने वाले का मुंह पूर्व की ओर रहे। पूर्व संभव न हो तो कई लोग उत्तर की ओर मुंह को भी ठीक मानते हैं। दक्षिण की ओर मुंह करके खाना बनाना वास्तु में टाला जाता है।
  2. सिंक और पानी का फिल्टर: उत्तर-पूर्व हिस्से में। आग और पानी विपरीत तत्व माने जाते हैं, इसलिए चूल्हा और सिंक एक ही स्लैब पर सटे न हों। कम से कम एक हाथ की दूरी रखें।
  3. फ्रिज: दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में। इसे उत्तर-पूर्व के कोने में न रखें, और दीवार से थोड़ी जगह छोड़ें ताकि हवा चलती रहे।
  4. भारी डिब्बे और अनाज: दक्षिण या पश्चिम की दीवार के खानों में। हल्के बर्तन और रोज की चीजें उत्तर-पूर्व की तरफ।

गैस की लाइन या PNG का पाइप खुद न खिसकाएं। चूल्हे की जगह बदलनी हो तो गैस एजेंसी या अधिकृत फिटर को बुलाएं। वास्तु का कोई नियम सुरक्षा से ऊपर नहीं है।

किचन का रंग: रसोई की दीवारों के लिए कौन सा रंग शुभ है?

वास्तु में रसोई के लिए हल्के और गर्म रंग अच्छे माने जाते हैं, क्योंकि यह अग्नि की जगह है। सबसे आम सुझाव ये हैं:

रंग कहाँ इस्तेमाल करें परंपरागत मान्यता
नारंगी या केसरिया अलमारियां, दक्षिण-पूर्व की दीवार अग्नि तत्व से जुड़ा, भूख और उत्साह बढ़ाने वाला
पीला दीवारें, खासकर जहां धूप कम आती है रोशनी को फैलाता है, रसोई खुली लगती है
सफेद या क्रीम दीवार, छत, फर्श; उत्तर-पश्चिम की रसोई में खास सफाई और शांति का रंग
हल्का हरा दीवार या टाइल का एक हिस्सा ताजगी और सेहत से जोड़ा जाता है
हल्का गुलाबी एक दीवार या सजावट घर के लोगों में मेल-जोल का रंग माना जाता है
चॉकलेट ब्राउन दक्षिण-पश्चिम की दीवार, लकड़ी का काम स्थिरता और गर्माहट

काला, गहरा नीला और गहरा स्लेटी रंग रसोई में आमतौर पर टाले जाते हैं। नीला जल का रंग माना जाता है, जो अग्नि के कोने से मेल नहीं खाता। फर्श के लिए सफेद, हल्का भूरा या आइवरी रंग की टाइल का सुझाव दिया जाता है, और स्लैब के लिए प्राकृतिक पत्थर को अच्छा माना गया है।

किराए के घर में दीवार रंगवाना मुश्किल हो, तो रंग छोटी चीजों से लाया जा सकता है: पीले या नारंगी कंटेनर, हल्के हरे पर्दे, लकड़ी के रंग का चॉपिंग बोर्ड। काले ग्रेनाइट की स्लैब को बदलना जरूरी नहीं है; ज्यादातर फ्लैटों में यही लगी होती है।

तवा, बर्तन और रसोई की रोज की आदतें

रसोई के वास्तु में कई बातें दिशा से ज्यादा आदत से जुड़ी हैं। उत्तर भारत के घरों में दादी-नानी से सुनी ये बातें अक्सर वास्तु के नाम से बताई जाती हैं:

  • तवा उल्टा न रखें: लोहे के तवे को राहु से जोड़ा जाता है। परंपरा कहती है कि इस्तेमाल के बाद उसे धोकर सीधा रखें, और ऐसी जगह रखें जहां बाहर से आने वाले की नजर सीधे न पड़े।
  • गर्म तवे पर पानी न डालें: छन्न की आवाज को कई घरों में अशुभ माना जाता है। व्यावहारिक कारण भी है: अचानक ठंडा पानी तवे को टेढ़ा कर सकता है।
  • पहली रोटी गाय के लिए: बहुत से परिवार दिन की पहली रोटी गाय के नाम से अलग रखते हैं।
  • टूटे और चटके बर्तन: इन्हें रसोई में रखना ठीक नहीं माना जाता। टूटा कप या दरार वाली प्लेट हटा दें।
  • रात में जूठे बर्तन: सिंक में रातभर जूठे बर्तन छोड़ना वास्तु में भी मना है और सफाई के लिहाज से भी।

किन त्योहारों पर तवा चढ़ाया ही नहीं जाता, यह किस दिन रोटी नहीं बनाते में है। इनमें से किसी बात को न मानने से कोई अनहोनी होगी, ऐसा डर मन में न रखें। ये घर चलाने की पुरानी आदतें हैं, जिनमें ज्यादातर का सीधा संबंध सफाई और व्यवस्था से है।

किराए के फ्लैट में बिना तोड़-फोड़ के रसोई का वास्तु कैसे सुधारें?

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु के फ्लैटों में रसोई अक्सर उत्तर-पूर्व या उत्तर में बनी होती है, क्योंकि बिल्डर ने नक्शा जगह के हिसाब से बनाया है, वास्तु के हिसाब से नहीं। ऐसी रसोई में वास्तु के जानकार आमतौर पर ये बदलाव सुझाते हैं:

  1. चूल्हे को रसोई के अंदर दक्षिण-पूर्व हिस्से की ओर खिसकाएं, अगर स्लैब पर जगह हो। पूरी रसोई नहीं, केवल चूल्हे की जगह मायने रखती है।
  2. पकाते समय मुंह पूर्व की ओर रखें। इसके लिए कई बार केवल चूल्हे को स्लैब पर घुमाना काफी होता है।
  3. उत्तर-पूर्व की रसोई में उस कोने को खाली और साफ रखें। वहां पानी का घड़ा, फिल्टर या कोई हल्की चीज रखें, कूड़ेदान नहीं।
  4. रोशनी अच्छी रखें। खिड़की न हो तो पीली रोशनी वाला बल्ब लगाएं। अंधेरी रसोई को वास्तु और सेहत दोनों में ठीक नहीं माना जाता।
  5. चूल्हे और सिंक के बीच दूरी न हो सके तो बीच में लकड़ी का एक छोटा बोर्ड या कोई पौधा रखा जाता है।

कुछ लोग पिरामिड, यंत्र या महंगे वास्तु उपकरण बेचते हैं। इनका असर साबित नहीं है, और किराए के घर में इन पर पैसे खर्च करने की कोई जरूरत नहीं। ऊपर के बदलाव मुफ्त हैं और इनसे रसोई काम करने में भी आसान होती है।

रसोई से जुड़ी एक बड़ी रस्म नए घर में पहली बार चूल्हा जलाने की है। उसके बारे में हमने गृह प्रवेश में दूध उबालने वाले लेख में लिखा है। रसोई के अलावा पूरे घर में वास्तु दोष पहचानने के लिए वास्तु दोष के लक्षण और उपाय पढ़ें।

रसोई के वास्तु से जुड़े सामान्य सवाल

क्या उत्तर-पूर्व में बनी रसोई में खाना बनाना बंद कर देना चाहिए?

नहीं। वास्तु इसे दोष मानता है, पर इसका हल रसोई बंद करना नहीं है। चूल्हे को रसोई के दक्षिण-पूर्व हिस्से में रखें, उत्तर-पूर्व का कोना साफ रखें और पूर्व की ओर मुंह करके खाना बनाएं। बड़ा बदलाव तभी करें जब घर आपका अपना हो और नवीनीकरण पहले से तय हो।

क्या रसोई और पूजा घर एक साथ हो सकते हैं?

छोटे फ्लैटों में कई परिवार रसोई के एक खाने में भगवान रखते हैं। वास्तु में इसे आदर्श नहीं माना जाता, पर जगह न हो तो मंदिर को चूल्हे से दूर, उत्तर-पूर्व की ओर रखें। घर के मंदिर के नियमों पर पूरा लेख है: घर का मंदिर: दिशा, रंग और क्या न रखें।

क्या रसोई में काली स्लैब अशुभ है?

वास्तु में गहरे रंगों को रसोई के लिए पहली पसंद नहीं माना जाता, पर स्लैब बदलना जरूरी नहीं है। दीवारों, अलमारियों और रोशनी को हल्का और गर्म रखें, यही काफी माना जाता है।

खाना बनाते समय किस दिशा में मुंह होना चाहिए?

परंपरा में पूर्व की ओर मुंह सबसे अच्छा माना जाता है। दूसरा विकल्प उत्तर है। दक्षिण की ओर मुंह करके खाना बनाना वास्तु में टाला जाता है।

Kitchen Vastu में सबसे जरूरी नियम कौन सा है?

चूल्हे की जगह। लगभग सभी वास्तु जानकार मानते हैं कि गैस चूल्हा रसोई के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) हिस्से में हो और खाना बनाने वाले का मुंह पूर्व की ओर रहे। किचन का रंग, फ्रिज और सिंक की जगह इसके बाद आते हैं।

यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।

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