तुलसी
तुलसी का पौधा किस दिशा में लगाएं? रविवार के नियम
चौघड़िया नाउ · 13 अक्टूबर 2026 को छपा · 7 मिनट में पढ़ें
वास्तु के अनुसार तुलसी का पौधा घर की उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना सबसे अच्छा माना जाता है, जहां सुबह की धूप आए। दक्षिण दिशा में तुलसी रखने से ज्यादातर परिवार बचते हैं। रविवार, एकादशी और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते न तोड़ने की परंपरा है, और रविवार को कई घरों में जल भी नहीं चढ़ाया जाता।
तुलसी शायद अकेला पौधा है जिसके बारे में हर घर में कुछ न कुछ नियम चलता है। किसी की नानी कहती थीं कि शाम को दीया जलाना है, किसी के घर में रविवार को पत्ता छूना मना था। फ्लैट में रहने वाले लोगों के लिए सवाल अलग है: बालकनी दक्षिण में है तो क्या करें? और तुलसी बार-बार सूख जाए तो क्या यह कोई संकेत है? इस लेख में यही सवाल हैं।
वास्तु के अनुसार तुलसी किस दिशा में लगानी चाहिए?
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को सबसे पवित्र दिशा माना जाता है, इसलिए तुलसी के लिए इसे पहली पसंद बताया जाता है। उत्तर और पूर्व दिशा भी अच्छी मानी जाती हैं। आंगन वाले पुराने घरों में तुलसी चौरा आंगन के बीच में होता था, जो भी शुभ माना गया है।
दक्षिण दिशा के बारे में ज्यादातर वास्तु जानकार मना करते हैं, क्योंकि इसे यम और पितरों की दिशा माना जाता है। कुछ लोग पश्चिम को चल जाने वाला मानते हैं। इसके पीछे एक सीधी व्यावहारिक बात भी है: तुलसी को रोज चार से छह घंटे की धूप चाहिए। उत्तर-पूर्व कोने के बाकी नियम ईशान कोण और दक्षिण दिशा में हैं। पूर्व और उत्तर की बालकनी में सुबह की नरम धूप मिलती है, जो इस पौधे के लिए सबसे अच्छी है।
फ्लैट में दक्षिण की बालकनी हो तो? बहुत से लोगों के पास बस एक ही बालकनी होती है। ऐसे में दो रास्ते हैं। पहला, अगर घर में पूर्व या उत्तर की कोई खिड़की है जहां धूप आती है, तो तुलसी का गमला वहां रखें। दूसरा, अगर कोई और जगह नहीं है, तो दक्षिण की बालकनी में ही रखें। सूखी हुई तुलसी से धूप में हरी-भरी तुलसी बेहतर है, और ज्यादातर पंडित भी यही कहते हैं कि तुलसी का घर में होना दिशा से ज्यादा जरूरी है।
तुलसी लगाने और पूजा के नियम क्या हैं?
उत्तर भारत के घरों में तुलसी से जुड़े ये नियम सबसे ज्यादा माने जाते हैं:
- जमीन से ऊंचा रखें: तुलसी को सीधे फर्श पर न रखकर गमले या चौरे में थोड़ी ऊंचाई पर रखा जाता है।
- सुबह जल, शाम को दीया: सुबह नहाने के बाद जल चढ़ाना और शाम को तुलसी के पास घी या तिल के तेल का दीया जलाना आम परंपरा है।
- गमले के आसपास सफाई: तुलसी के पास जूते-चप्पल, कूड़ेदान या झाड़ू न रखें।
- कांटेदार पौधों से दूर: कैक्टस जैसे कांटेदार पौधे तुलसी के गमले के पास नहीं रखे जाते।
- पौधों की संख्या: कुछ परिवार एक, तीन या पांच, यानी विषम संख्या में तुलसी रखते हैं। यह स्थानीय रिवाज है, हर जगह नहीं माना जाता।
तुलसी की दो आम किस्में हैं: हरी पत्तियों वाली राम तुलसी और बैंगनी-काली पत्तियों वाली श्याम तुलसी। पूजा में दोनों ही इस्तेमाल होती हैं। कई घरों में दोनों एक साथ लगाई जाती हैं।
रविवार को तुलसी के पत्ते क्यों नहीं तोड़ते, और जल चढ़ाएं या नहीं?
परंपरा के अनुसार रविवार, एकादशी, अमावस्या, द्वादशी और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते। ग्रहण के समय भी यही नियम है। रविवार को कई परिवार तुलसी को जल भी नहीं चढ़ाते।
इसके पीछे जो कथा सबसे ज्यादा सुनाई जाती है, वह यह है कि तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय हैं और रविवार के दिन वे विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए उस दिन उन्हें जल चढ़ाना या उनके पत्ते तोड़ना व्रत में बाधा माना जाता है। एकादशी के बारे में भी यही बात कही जाती है। यह लोक कथा है, और अलग-अलग इलाकों में इसके रूप अलग हैं।
यहां एक मतभेद भी है। कुछ परिवारों में रविवार को जल चढ़ाना मना है, जबकि कई घरों में रोज जल चढ़ता है, रविवार भी। दोनों रिवाज अपने-अपने घरों में पीढ़ियों से चल रहे हैं। आपके परिवार में जो चलता आया है, वही मानें।
अगर रविवार को पूजा या प्रसाद के लिए तुलसी चाहिए? इसका हल पुराना है: शनिवार को ही पत्ते तोड़कर रख लें। तुलसी के पत्ते एक-दो दिन तक बासी नहीं माने जाते। पत्ते तोड़ते समय नाखून से नोचने के बजाय उंगलियों से हल्के से तोड़ें और पौधे से अनुमति के भाव से तोड़ें, यह भी घरों में सिखाया जाता है।
तुलसी सूख जाए तो क्या करें?
तुलसी सूखने को कई लोग अशुभ संकेत मान लेते हैं। ज्यादातर मामलों में इसके कारण साधारण होते हैं: ज्यादा पानी, कम धूप, सर्दियों में पाला, या गमले में पानी निकलने का छेद न होना। सर्दी में तुलसी अक्सर कमजोर पड़ती है, और नवंबर से जनवरी तक दिल्ली-एनसीआर में कई घरों की तुलसी सूखती है।
सूखी तुलसी के बारे में परंपरा कहती है:
- उसे कूड़े में न फेंकें। सूखी लकड़ी और पत्तियों को किसी दूसरे गमले की मिट्टी में दबा दें, या बहते पानी में प्रवाहित करें। शहर में नदी तक जाना संभव न हो तो मिट्टी में दबाना ही काफी है।
- सूखी तुलसी की लकड़ी से कई लोग माला बनाते हैं या उसे पूजा में रखते हैं।
- नई तुलसी किसी शुभ दिन लगाई जाती है। कार्तिक महीना तुलसी लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
घर में सूखी तुलसी का गमला लंबे समय तक रखा रहना वास्तु में ठीक नहीं माना जाता। पौधा न बचे तो सम्मान से हटाकर नया लगा दें।
तुलसी विवाह 2026 कब है?
कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी (देवुत्थान) एकादशी होती है, और उसके बाद तुलसी विवाह मनाया जाता है। 2026 में नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार देवउठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को है और तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को है। कई परिवार एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह करते हैं, इसलिए अपने घर की परंपरा देखें।
दिवाली के बाद के पूरे त्योहारों का क्रम हमारे 2026 के प्रमुख व्रत-त्योहार वाले लेख में है। धनतेरस और दिवाली पर घर में कौन से पौधे लाए जाते हैं, यह धनतेरस पर क्या खरीदें वाले लेख में देखें, और बाकी पौधों के बारे में घर के लिए शुभ पौधे पढ़ें।
तुलसी से जुड़े सामान्य सवाल
क्या तुलसी को घर के अंदर रख सकते हैं?
रख सकते हैं, अगर वहां रोज कुछ घंटे सीधी धूप आती हो। बिना धूप के कमरे में तुलसी कुछ हफ्तों में कमजोर हो जाती है। परंपरा में भी तुलसी को आंगन, बालकनी या खिड़की पर रखने की बात है।
क्या शाम को तुलसी को छू सकते हैं?
शाम को दीया जलाने के लिए तुलसी के पास जाना ठीक है। सूर्यास्त के बाद पत्ते तोड़ना और पौधे को हिलाना परंपरा में मना है।
क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान तुलसी में जल दे सकती हैं?
कुछ परिवारों में इन दिनों तुलसी पूजा से दूर रहने का रिवाज है, और कई घरों में यह नियम नहीं माना जाता। यह पूरी तरह परिवार की परंपरा पर है; इसे लेकर किसी पर दबाव बनाना ठीक नहीं।
तुलसी के पास कौन सा दीया जलाएं?
घी का दीया सबसे आम है। कई घरों में तिल या सरसों के तेल का दीया भी जलता है। दीया गमले के पास स्थिर जगह पर रखें, सूखी पत्तियों और परदों से दूर।
Tulsi plant direction as per vastu क्या है?
वास्तु में तुलसी के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सबसे अच्छी दिशा मानी जाती है, फिर उत्तर और पूर्व। दक्षिण दिशा से ज्यादातर परिवार बचते हैं। सबसे जरूरी बात है कि पौधे को सुबह की धूप मिले।
यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।
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