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मुख्य द्वार का वास्तु: गणेश जी, घोड़े की नाल और फूल

मुख्य द्वार (मेन गेट) पर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर इस तरह लगाई जाती है कि उनका मुंह घर के अंदर की ओर हो, क्योंकि परंपरा में गणेश जी की पीठ घर की ओर होना ठीक नहीं माना जाता। घोड़े की नाल दरवाजे के ऊपर बीच में, U आकार में टांगी जाती है। दरवाजे के पास कांटेदार, दूध वाले और सूखे फूल-पौधे नहीं लगाए जाते।

घर का मुख्य दरवाजा वास्तु में “मुख” माना जाता है: जिस रास्ते से घर में लोग, रोशनी और हवा आती है। दिवाली से पहले बहुत से लोग दरवाजे को सजाते हैं, नई नेमप्लेट लगाते हैं और गणेश जी की मूर्ति ढूंढते हैं। यहीं सबसे ज्यादा सवाल उठते हैं: मूर्ति बाहर की तरफ लगे या अंदर? नाल का मुंह ऊपर या नीचे? फ्लैट में जगह कम हो तो क्या करें?

मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति कैसे लगाएं?

मुख्य द्वार पर गणेश जी को घर के रक्षक के रूप में बिठाया जाता है। इसके नियम जगह-जगह थोड़े अलग हैं, पर सबसे ज्यादा माने जाने वाले ये हैं:

  1. पीठ घर की तरफ न हो: मान्यता है कि गणेश जी के मुख की ओर सुख और पीठ की ओर दरिद्रता रहती है। इसलिए दरवाजे के बाहर लगी मूर्ति की पीठ घर की तरफ हो जाती है, जिसे टाला जाता है।
  2. दो मूर्तियों का उपाय: बाहर गणेश जी लगाने हों, तो कई लोग ठीक उसी जगह अंदर की तरफ भी एक मूर्ति या तस्वीर लगाते हैं, ताकि दोनों की पीठ आपस में मिली रहे। इस तरह बाहर से भी गणेश जी दिखते हैं और घर की ओर उनकी पीठ नहीं होती।
  3. बैठी हुई मुद्रा: घर के लिए बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति अच्छी मानी जाती है।
  4. सूंड की दिशा: घर में ज्यादातर बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले (वाममुखी) गणेश रखे जाते हैं। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश के पूजा नियम कड़े माने जाते हैं, इसलिए वे मंदिरों में ज्यादा मिलते हैं।
  5. आकार छोटा रखें: दरवाजे के ऊपर या बगल में छोटी मूर्ति या तस्वीर काफी है।

फ्लैट में जहां बाहर का दरवाजा कॉमन लॉबी में खुलता है, वहां कई परिवार गणेश जी की छोटी तस्वीर दरवाजे के ऊपर अंदर की तरफ लगाते हैं। यह भी परंपरा के हिसाब से ठीक माना जाता है।

घोड़े की नाल (Horseshoe) दरवाजे पर क्यों और कैसे लगाते हैं?

घोड़े की नाल लोहे की होती है, और भारत में इसे शनि से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि दरवाजे पर लगी नाल बुरी नजर और नकारात्मकता को रोकती है। यह रिवाज यूरोप में भी है, जहां इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

कैसी नाल लें: परंपरा में काले घोड़े के पैर से उतरी हुई, पुरानी नाल को सबसे असरदार माना जाता है। बाजार में मिलने वाली नई नाल भी बहुत लोग लगाते हैं। कई परिवार इसे शनिवार को लगाते हैं।

मुंह ऊपर या नीचे: यहां दो मत हैं, और दोनों अपने-अपने घरों में माने जाते हैं।

  • एक मत कहता है कि नाल का मुंह ऊपर की ओर हो (U आकार), ताकि सौभाग्य उसमें “भरा” रहे। पश्चिमी परंपरा भी यही मानती है।
  • दूसरा मत कहता है कि मुंह नीचे की ओर हो (उल्टा U), ताकि आशीर्वाद घर में आने वालों पर बरसे। भारत में दुकानों के दरवाजों पर अक्सर ऐसी ही नाल दिखती है।

घरों के लिए पहला तरीका ज्यादा आम है। आपके घर में जो चला आ रहा है, उसे बदलने की जरूरत नहीं।

कहाँ लगाएं: दरवाजे की चौखट के ऊपर, बीच में, बाहर की तरफ। कुछ लोग इसे सात कीलों से ठोकते हैं; यह भी स्थानीय रिवाज है। किराए के फ्लैट में कील ठोकने की अनुमति न हो, तो मजबूत डबल-साइड टेप या हुक से भी काम चलता है।

मुख्य द्वार (मेन गेट) पर कौन से फूल और पौधे नहीं लगाने चाहिए?

वास्तु में दरवाजे के पास हरे-भरे, गोल पत्तियों वाले पौधे अच्छे माने जाते हैं। कुछ पौधों से बचने की सलाह दी जाती है:

  • कांटेदार पौधे: कैक्टस और बड़े कांटों वाले पौधे दरवाजे के पास नहीं रखे जाते। मान्यता है कि ये घर के लोगों के बीच कड़वाहट बढ़ाते हैं। गुलाब इसका अपवाद माना जाता है, क्योंकि उसे फूल के लिए लगाया जाता है।
  • दूध वाले पौधे: जिन पौधों के तने या पत्ते तोड़ने पर सफेद दूध निकलता है, जैसे आक, उन्हें घर के मुख्य द्वार पर नहीं लगाया जाता।
  • सूखे और मुरझाए फूल: तोरण या बंदनवार के फूल सूख जाएं तो बदल दें। सूखे फूलों की माला दरवाजे पर टांगे रखना ठीक नहीं माना जाता।
  • बोनसाई: कुछ वास्तु जानकार बोनसाई को “रुकी हुई बढ़त” का प्रतीक मानकर मना करते हैं। कई लोग इसे नहीं मानते।
  • प्लास्टिक के फूल: इन पर धूल जमती है और ये कभी बदलते नहीं। कई जानकार असली फूल या पत्तों की तोरण को बेहतर मानते हैं।

दरवाजे के दोनों तरफ तुलसी, मनी प्लांट या गेंदे के गमले रखना अच्छा माना जाता है। आम या अशोक के पत्तों की तोरण भी पुराना और सस्ता तरीका है। दिवाली पर दरवाजा सजाने के बारे में ज्यादा धनतेरस पर क्या खरीदें, मुख्य द्वार पर क्या रखें वाले लेख में है, और पौधों की पूरी सूची घर के लिए शुभ पौधे में।

मुख्य द्वार के रोज के नियम क्या हैं?

दरवाजे का वास्तु ज्यादातर सफाई और व्यवस्था का मामला है। परंपरा में ये बातें बार-बार कही जाती हैं:

  1. दरवाजा अंदर की ओर खुले और खुलते समय आवाज न करे। चरमराते कब्जों में तेल डाल दें।
  2. दरवाजे के ठीक सामने कूड़ेदान, जूतों का ढेर या टूटा सामान न हो। जूते कहाँ रखें, इस पर ईशान कोण और दक्षिण दिशा वाले लेख में लिखा है।
  3. दहलीज साफ रखें। कई घरों में सुबह दहलीज पर पानी छिड़का जाता है और त्योहारों पर रंगोली बनती है।
  4. रोशनी: शाम होते ही दरवाजे पर बल्ब जलाएं। अंधेरा दरवाजा वास्तु में ठीक नहीं माना जाता।
  5. नेमप्लेट: साफ और पढ़ने में आसान नेमप्लेट लगाएं। टूटी या धुंधली नेमप्लेट बदल दें।
  6. दरवाजे के सामने आईना नहीं: मुख्य द्वार के ठीक सामने आईना लगाना मना है, क्योंकि मान्यता है कि यह आती हुई ऊर्जा को लौटा देता है।
  7. स्वास्तिक और शुभ-लाभ: हल्दी या रोली से दरवाजे पर स्वास्तिक बनाना और दोनों तरफ शुभ-लाभ लिखना आम रिवाज है।

मुख्य द्वार से जुड़े सामान्य सवाल

क्या मुख्य द्वार पर काले रंग का पेंट कर सकते हैं?

वास्तु में दरवाजे के लिए लकड़ी का प्राकृतिक रंग, भूरा, क्रीम या हल्का पीला अच्छा माना जाता है। काला रंग आमतौर पर टाला जाता है। फ्लैट में जहां सोसायटी ने एक रंग तय किया हो, वहां उसे बदलने की जरूरत नहीं।

दो दरवाजे आमने-सामने हों तो क्या करें?

फ्लैटों में अक्सर दो घरों के दरवाजे आमने-सामने होते हैं। वास्तु इसे दोष मानता है, पर उपाय आसान है: अपने दरवाजे पर तोरण और स्वास्तिक लगाएं और दरवाजा बंद रखें। पड़ोसी के दरवाजे की ओर आईना या कोई “उल्टा” उपाय न लगाएं; इससे रिश्ते खराब होते हैं।

क्या सीढ़ियां मुख्य द्वार के ठीक सामने होनी चाहिए?

वास्तु में दरवाजे के ठीक सामने सीढ़ी को अच्छा नहीं माना जाता। अपार्टमेंट में यह आपके हाथ में नहीं है। दरवाजे के अंदर एक पौधा या परदा रखकर सीधी नजर रोकने का सुझाव दिया जाता है।

दिवाली पर मुख्य द्वार पर दीया कितने बजे जलाएं?

शाम को सूर्यास्त के बाद, लक्ष्मी पूजा से पहले। आपके शहर में सूर्यास्त कब है, यह आज का चौघड़िया पेज पर दिन के समय के साथ दिखता है।

Main door vastu में किस दिशा का दरवाजा सबसे अच्छा है?

उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व की ओर खुलने वाले मुख्य द्वार को वास्तु में सबसे अच्छा माना जाता है। दक्षिण या पश्चिम का दरवाजा अपने आप अशुभ नहीं है; वहां दरवाजे की सटीक जगह देखी जाती है, जिसके बारे में ईशान कोण और दक्षिण दिशा में लिखा है।

यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।

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