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प्लॉट वास्तु

प्लॉट या घर खरीदते समय वास्तु: बाथरूम की दिशा भी

वास्तु के अनुसार घर के लिए चौकोर या आयताकार प्लॉट सबसे अच्छा माना जाता है, जिसकी जमीन दक्षिण-पश्चिम में ऊंची और उत्तर-पूर्व में नीची हो। कटा हुआ उत्तर-पूर्व कोना, त्रिकोण या टेढ़ा-मेढ़ा आकार और सामने से आकर टकराती सड़क टाली जाती है। बाथरूम उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में, और कभी भी उत्तर-पूर्व या घर के बीच में नहीं।

प्लॉट या फ्लैट खरीदना ज्यादातर परिवारों के लिए जीवन का सबसे बड़ा खर्च होता है, और इसमें वास्तु केवल एक पहलू है। कागजात, RERA रजिस्ट्रेशन, लोन, पानी और रास्ता पहले देखें। उसके बाद वास्तु की जांच काम आती है, क्योंकि एक बार नींव डल गई या फ्लैट रजिस्टर हो गया, तो बदलाव मुश्किल है।

प्लॉट खरीदते समय वास्तु में क्या देखें?

आकार: चौकोर और आयताकार प्लॉट सबसे अच्छे माने जाते हैं। जिस आयताकार प्लॉट की लंबाई चौड़ाई से दोगुनी से ज्यादा न हो, उसे बेहतर बताया जाता है। त्रिकोण, गोल या बहुत टेढ़े प्लॉट को घर के लिए ठीक नहीं माना जाता।

कोने: उत्तर-पूर्व का कोना कटा हुआ हो तो वास्तु में इसे बड़ा दोष माना जाता है। उल्टा, अगर उत्तर-पूर्व का कोना थोड़ा बढ़ा हुआ हो, तो इसे शुभ माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम का बढ़ा हुआ कोना ठीक नहीं माना जाता।

आगे-पीछे की चौड़ाई: जो प्लॉट आगे से संकरा और पीछे से चौड़ा हो, उसे “गौमुखी” कहते हैं और घर के लिए अच्छा मानते हैं। आगे से चौड़ा और पीछे से संकरा “शेरमुखी” प्लॉट दुकान या कारोबार के लिए अच्छा माना जाता है।

ढलान: जमीन का ढलान उत्तर या पूर्व की ओर हो, यानी बारिश का पानी उत्तर-पूर्व की तरफ बहे। दक्षिण-पश्चिम का हिस्सा ऊंचा हो।

सड़क: उत्तर या पूर्व की ओर सड़क वाले प्लॉट को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, पर दक्षिण और पश्चिम की सड़क वाले प्लॉट भी सही नक्शे से अच्छे बन सकते हैं। जिस प्लॉट पर सामने से कोई सड़क आकर सीधे टकराती हो (T-जंक्शन), उसे “वीथि शूल” या मार्ग वेध कहा जाता है और टाला जाता है।

आसपास: प्लॉट के ठीक सामने बड़ा पेड़, बिजली का खंभा या ट्रांसफॉर्मर न हो। कुछ परंपराएं श्मशान, अस्पताल या बड़े मंदिर के ठीक पास के प्लॉट को घर के लिए नहीं चुनतीं।

मिट्टी की परंपरागत जांच कैसे होती है?

पुराने समय में प्लॉट खरीदने से पहले मिट्टी की एक आसान जांच की जाती थी। प्लॉट के बीच में करीब एक हाथ गहरा, एक हाथ लंबा और एक हाथ चौड़ा गड्ढा खोदा जाता था, और उसी मिट्टी से वापस भरा जाता था:

  • मिट्टी बच जाए, तो जमीन बहुत अच्छी मानी जाती थी।
  • गड्ढा बराबर भर जाए, तो ठीक।
  • गड्ढा पूरा न भरे, तो जमीन को कमजोर माना जाता था।

इस जांच के पीछे की समझ आज भी काम की है: ढीली, भराव वाली या दलदली जमीन नींव के लिए ठीक नहीं होती। आज यही काम सॉइल टेस्ट करता है, जो इंजीनियर कराते हैं। बड़ा मकान बनवाना हो तो सॉइल टेस्ट जरूर कराएं; परंपरा की जांच उसकी जगह नहीं है।

घर बनवाते समय बाथरूम और टॉयलेट किस दिशा में हों?

वास्तु में बाथरूम और शौचालय की दिशा सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में है, क्योंकि गलत जगह बना शौचालय बाद में बदला नहीं जा सकता।

जगह वास्तु की राय
उत्तर-पश्चिम (वायव्य) शौचालय के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है
पश्चिम अच्छी
दक्षिण, या दक्षिण और पश्चिम के बीच कई जानकार ठीक मानते हैं
पूर्व केवल नहाने के लिए (बिना शौचालय) ठीक
उत्तर-पूर्व (ईशान) कभी नहीं
घर का बीच (ब्रह्मस्थान) कभी नहीं
दक्षिण-पश्चिम का कोना ज्यादातर जानकार मना करते हैं

बाथरूम बनवाते समय कुछ और बातें भी देखी जाती हैं:

  1. शौचालय की सीट इस तरह लगे कि बैठने वाले का मुंह उत्तर या दक्षिण की ओर हो। कुछ जानकार पूर्व-पश्चिम को भी ठीक मानते हैं, यहां मत एक नहीं है।
  2. बाथरूम का दरवाजा रसोई या मंदिर के ठीक सामने न खुले।
  3. एग्जॉस्ट फैन और खिड़की पूर्व या उत्तर की दीवार पर हो।
  4. नहाने का हिस्सा पूर्व या उत्तर की ओर, शौचालय पश्चिम या दक्षिण की ओर।
  5. बाथरूम की दीवार पूजा घर या रसोई के चूल्हे वाली दीवार से साझा न हो।

पानी की टंकी, सेप्टिक टैंक और सीढ़ी कहाँ हो?

  • जमीन के नीचे पानी की टंकी या बोरवेल: उत्तर-पूर्व में सबसे अच्छी मानी जाती है।
  • छत पर पानी की टंकी: दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में, क्योंकि यह भारी होती है।
  • सेप्टिक टैंक: उत्तर-पश्चिम में। उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में नहीं।
  • सीढ़ी: दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में, घड़ी की दिशा में ऊपर चढ़ती हुई। घर के बीच में या उत्तर-पूर्व में नहीं।
  • रसोई: दक्षिण-पूर्व, जिसके बारे में रसोई का वास्तु में विस्तार से है।

फ्लैट खरीदने से पहले वास्तु की जांच सूची

फ्लैट में आप नक्शा नहीं बदल सकते, इसलिए जांच खरीदने से पहले ही करें। साइट विजिट पर मोबाइल का कंपास साथ रखें और ये देखें:

  1. मुख्य द्वार किस दिशा में खुलता है, और उसके ठीक सामने लिफ्ट या सीढ़ी तो नहीं।
  2. उत्तर-पूर्व कोने में शौचालय तो नहीं।
  3. रसोई और चूल्हे की जगह, और पकाते समय मुंह किधर होगा।
  4. मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में है या नहीं।
  5. सुबह की धूप किस कमरे में आती है, और क्रॉस-वेंटिलेशन है या नहीं।
  6. फ्लैट का आकार: कहीं कोई कोना कटा तो नहीं।

सौ फीसदी वास्तु के हिसाब से बना फ्लैट मिलना मुश्किल है। ज्यादातर परिवार दो-तीन बड़ी बातें, जैसे ईशान कोण में शौचालय न होना और रसोई की ठीक जगह, देखकर बाकी में समझौता करते हैं। छोटे दोषों के उपाय वास्तु दोष के लक्षण और उपाय में हैं, और दिशाओं के बुनियादी नियम ईशान कोण और दक्षिण दिशा में।

भूमि पूजन और गृह प्रवेश का मुहूर्त कैसे चुनें?

नींव डालने से पहले भूमि पूजन और घर तैयार होने पर गृह प्रवेश, दोनों के लिए मुहूर्त देखा जाता है। तारीख के लिए तिथि, नक्षत्र और परिवार के पुरोहित की सलाह पहले आती है। उस दिन के भीतर समय चुनने में शहर का आज का चौघड़िया मदद करता है, जिसमें शुभ, लाभ और अमृत के समय दिखते हैं। कई परिवार राहु काल में शुरुआत नहीं करते, और दोपहर का अभिजीत मुहूर्त भी एक विकल्प माना जाता है, बुधवार को छोड़कर।

गृह प्रवेश की पूजा, दूध उबालने की रस्म और मुहूर्त पर पूरा लेख है: गृह प्रवेश में दूध क्यों उबालते हैं? सही मुहूर्त और नियम। रजिस्ट्री या टोकन मनी के लिए चौघड़िया चुनने के तरीके सबसे अच्छा चौघड़िया में हैं।

प्लॉट और नए घर से जुड़े सामान्य सवाल

क्या दक्षिणमुखी प्लॉट नहीं लेना चाहिए?

दक्षिणमुखी प्लॉट को अपने आप बुरा नहीं माना जाता। उसमें मुख्य द्वार की सटीक जगह और नक्शा ज्यादा मायने रखता है। अच्छी जगह, सही कीमत और साफ कागजात वाला दक्षिणमुखी प्लॉट छोड़ने की जरूरत नहीं।

पुराना मकान खरीद रहे हैं, तो क्या देखें?

ऊपर वाली जांच सूची के साथ यह भी देखें कि सीलन, दरारें और पाइपलाइन किस हालत में हैं। कई परिवार पुराने घर में जाने से पहले वास्तु शांति की पूजा कराते हैं; यह आस्था का मामला है।

क्या कोने वाला प्लॉट अच्छा है?

दो सड़कों वाला कोने का प्लॉट, खासकर उत्तर-पूर्व कोने का, वास्तु में बहुत अच्छा माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम कोने का प्लॉट उतना पसंद नहीं किया जाता।

भूमि पूजन किस दिशा में किया जाता है?

परंपरा में नींव की पहली खुदाई उत्तर-पूर्व कोने से शुरू की जाती है, और भूमि पूजन भी इसी कोने में होता है। यह परिवार के पुरोहित की रीति के अनुसार बदल सकता है।

यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।

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