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रसोई नियम

किस दिन रोटी नहीं बनाते? थाली में तीन रोटी क्यों नहीं

उत्तर भारत की परंपरा में कुछ दिनों पर घर में रोटी नहीं बनाई जाती और तवा नहीं चढ़ाया जाता: शरद पूर्णिमा, दिवाली, नाग पंचमी, शीतला अष्टमी, मकर संक्रांति और घर में किसी की मृत्यु के बाद तेरहवीं तक। इन दिनों खीर-पूरी, खिचड़ी या बासी भोजन बनता है। थाली में एक साथ तीन रोटी न परोसने का रिवाज भी है, क्योंकि तीन रोटी की थाली को मृतक के भोग से जोड़ा जाता है।

ये नियम किसी एक ग्रंथ से नहीं, घरों की परंपरा से आते हैं, इसलिए हर परिवार में थोड़े अलग मिलते हैं। किसी के घर में नाग पंचमी पर तवा नहीं चढ़ता, किसी के घर में कोई फर्क नहीं पड़ता। इस लेख में हर दिन के साथ यह भी है कि वह 2026 में कब पड़ रहा है, ताकि रसोई की तैयारी पहले से हो सके।

किन दिनों पर रोटी नहीं बनाई जाती और क्यों?

इन सभी दिनों के पीछे एक साझा सोच है: त्योहार या खास तिथि पर रोज वाला भोजन नहीं, उस दिन का खास भोजन बनता है। तवे की रोटी रोज का खाना है, जबकि पूरी, खीर, खिचड़ी या पकवान उत्सव का।

दूसरी सोच तवे से जुड़ी है। लोहे के तवे को कई परिवार राहु का प्रतीक मानते हैं, और नाग पंचमी पर उसे नाग के फन जैसा माना जाता है। इसलिए कुछ खास दिनों पर तवा चूल्हे पर नहीं चढ़ाया जाता।

नीचे दी गई तारीखें नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार हैं। आपके शहर में कोई तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है, क्योंकि तिथि सूर्योदय के समय से गिनी जाती है।

दिन अगली तारीख उस दिन क्या बनता है
शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर 2026 खीर, पूरी
दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 पूरी, कचौड़ी, हलवा, मिठाई
मकर संक्रांति शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 खिचड़ी, तिल-गुड़
शीतला अष्टमी (बसौड़ा) होली के आठवें दिन, चैत्र कृष्ण अष्टमी एक दिन पहले बना बासी भोजन
नाग पंचमी शुक्रवार, 6 अगस्त 2027 कढ़ाई या पतीले का खाना

शरद पूर्णिमा और दिवाली पर रोटी क्यों नहीं?

शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी के प्रकट होने की रात माना जाता है। इस रात दूध और चावल की खीर बनाकर चांदनी में रखी जाती है और अगली सुबह प्रसाद के रूप में खाई जाती है। रसोई में उस दिन खीर और पूरी बनाने का रिवाज है, और कई परिवार रोटी नहीं बनाते। 2026 में शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को है।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के भोग के लिए पूरी, हलवा, खीर और मिठाई बनती है। कई घरों में मान्यता है कि लक्ष्मी पूजा के दिन तवा नहीं चढ़ाना चाहिए। 2026 में लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है, और उसी दिन नरक चतुर्दशी भी है। दिवाली के पूरे क्रम के लिए हमारा 2026 के प्रमुख व्रत-त्योहार लेख देखें, और धनतेरस की खरीदारी के लिए धनतेरस पर क्या खरीदें।

व्यावहारिक तौर पर देखें तो दिवाली के दिन रसोई पहले से भरी होती है। पूरी-कचौड़ी बन रही है, मेहमान आ रहे हैं, तो रोटी की जरूरत भी कम पड़ती है। परिवार में बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति के लिए सादा भोजन चाहिए हो, तो कई घर दाल-चावल या खिचड़ी बना लेते हैं।

नाग पंचमी पर तवा क्यों नहीं चढ़ाते?

नाग पंचमी पर कई इलाकों में, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में, चूल्हे पर तवा नहीं रखा जाता। मान्यता है कि गोल, उल्टा रखा तवा नाग के फन जैसा दिखता है, और उस दिन उसे आग पर रखना नाग देवता का अनादर है। कुछ परिवार उस दिन लोहे की कोई चीज, जैसे चाकू या कैंची, भी इस्तेमाल नहीं करते।

रोटी बनानी ही हो, तो कई घरों में तवे की जगह कढ़ाई या पतीला उल्टा रखकर रोटी सेकी जाती है। ज्यादातर घर उस दिन पूरी, खीर या दाल-बाटी जैसे पकवान बना लेते हैं। 2027 में नाग पंचमी शुक्रवार, 6 अगस्त को है।

शीतला अष्टमी और मकर संक्रांति पर क्या बनता है?

शीतला अष्टमी, जिसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसौड़ा कहते हैं, पर उस दिन चूल्हा ही नहीं जलाया जाता। एक दिन पहले, सप्तमी को, पूरी, पुए, दही-चावल और मीठे चावल बनाकर रख लिए जाते हैं। अष्टमी को शीतला माता को यही बासी भोजन चढ़ाया जाता है और घर के लोग भी यही खाते हैं। कुछ परिवार यह नियम सप्तमी को मानते हैं। यह त्योहार होली के आठवें दिन, चैत्र कृष्ण अष्टमी को आता है।

मकर संक्रांति पर उत्तर भारत में खिचड़ी बनाने और दान करने की परंपरा है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी पर्व ही कहते हैं। इस दिन कई घरों में रोटी नहीं बनती। 2027 में मकर संक्रांति शुक्रवार, 15 जनवरी को है। पंजाब और हरियाणा में इसी समय लोहड़ी के साथ मक्के की रोटी भी बनती है, इसलिए यह नियम हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं है।

घर में मृत्यु होने पर कई परिवारों में तेरहवीं तक घर में रोटी नहीं बनाई जाती, और शुरुआती दिनों में चूल्हा भी नहीं जलता। इन दिनों रिश्तेदार और पड़ोसी खाना भेजते हैं। यह शोक का रिवाज है, जिसके नियम हर समुदाय में अलग हैं।

थाली में एक साथ तीन रोटी क्यों नहीं परोसते?

बहुत से घरों में खाना परोसते समय यह कहा जाता है: तीन रोटी एक साथ मत रखो। इसके पीछे की मान्यता यह है कि किसी की मृत्यु के बाद तेरहवीं या श्राद्ध में मृतक के नाम से जो थाली निकाली जाती है, उसमें तीन रोटियां रखी जाती हैं। इसलिए जीवित व्यक्ति की थाली में एक साथ तीन रोटी परोसना ठीक नहीं माना जाता।

कुछ परिवार तीन अंक को ही शुभ कामों में टालते हैं, जैसे “तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा” वाली कहावत में।

इसका आसान हल हर घर में पहले से चल रहा है:

  • एक बार में दो रोटी परोसें, और तीसरी बाद में गर्म-गर्म दें।
  • तीन देनी ही हों, तो तीसरी रोटी का एक छोटा टुकड़ा तोड़कर अलग कर दें।
  • चार रोटी एक साथ देने में कोई मनाही नहीं है।

कुछ वीडियो और लेख इसका “वैज्ञानिक कारण” भी बताते हैं, जैसे एक बार में ज्यादा खाना न लेना। यह सलाह अपने आप में ठीक है, पर इसका संबंध तीन की गिनती से नहीं, भूख के हिसाब से परोसने से है।

रसोई की दिशा, चूल्हे की जगह और तवा रखने के नियमों पर हमारा अलग लेख है: रसोई का वास्तु: दिशा, रंग और बिना तोड़-फोड़ के उपाय।

रोटी के नियमों से जुड़े सामान्य सवाल

क्या अमावस्या को रोटी नहीं बनानी चाहिए?

कुछ परिवार अमावस्या को रोटी नहीं बनाते या उस दिन सादा भोजन करते हैं, खासकर पितृ पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या को। पर यह नियम उतना आम नहीं है जितना शरद पूर्णिमा या शीतला अष्टमी का। अपने घर की परंपरा देखें।

अगर इन दिनों रोटी बना ली तो क्या होगा?

कुछ नहीं होगा जिससे डरा जाए। ये परिवारों की रसोई की परंपराएं हैं, और इन्हें न मानने वाले भी बहुत से घर हैं। जो परिवार इन्हें मानता है, उसके लिए यह त्योहार का भोजन बनाने का तरीका है।

क्या रात की बची रोटी अगले दिन खा सकते हैं?

रोज के जीवन में बासी रोटी खाना आम है और बहुत से इलाकों में सुबह बासी रोटी नाश्ते में खाई जाती है। शीतला अष्टमी पर तो बासी भोजन ही प्रसाद है। बस गर्मी के मौसम में रोटी को ठीक से ढककर रखें।

दिवाली पर अगर घर में कोई बीमार है तो क्या करें?

सादा भोजन बनाएं। कोई भी परंपरा बीमार व्यक्ति को उसकी जरूरत का खाना देने से नहीं रोकती।

Roti kis din nahi banani chahiye?

परंपरा के अनुसार शरद पूर्णिमा, दिवाली (लक्ष्मी पूजा), नाग पंचमी, शीतला अष्टमी (बसौड़ा), मकर संक्रांति और घर में मृत्यु के बाद तेरहवीं तक। 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर और दिवाली 8 नवंबर को है। हर परिवार में यह सूची थोड़ी अलग होती है।

यह लेख बताता है कि पंचांग की परंपरा किसी समय के बारे में क्या कहती है; यह किसी की निजी सलाह नहीं है। ऊपर के पेजों पर समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से निकलता है।

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